आधी रोटी से भूख सँवारी
कभी आधे चाँद से रात
कभी आधी धूप की तपन में झुलसे
भीगे आधी बरसात
यूँही आधी आधी साँसे लेकर
आधे आधे सपने देखे
और आधे आधे मन से फिर
आधे प्रयास करके देखे
क़िस्मत कोशिश, कभी धर्म कर्म
कभी पैसे या वक़्त की हेर फेर
कभी भय, ग्लानि या लाज शर्म
कहीं पे है देर, कहीं पे अंधेर
अब सूनी सूनी, नम सी हैं
ये आधी सोयी आँखे
और आधी बंद इन आँखो से
आधी उम्मीदें झाँके
क्या ख़ूब किसी ने कहा कभी
की ग्लास भरा है आधा
पर आधे ख़ाली हिस्से का भी
तो होगा कोई इरादा
इस आधे जीवन से अब तो
बस हमने किया किनारा
और ज़ोर लगा कर पूरा अब
है मुस्कानो को पुकारा
अब हर लम्हा पूरा होगा
हर सपना होगा पूरा
ना कोशिश बाक़ी होगी अब
ना कोई लक्ष्य अधूरा

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