Monday, 24 July 2017

आधी ज़िन्दगी


आधी रोटी से भूख सँवारी

कभी आधे चाँद से रात

कभी आधी धूप की तपन में झुलसे 

भीगे आधी बरसात 


यूँही आधी आधी साँसे लेकर 

आधे आधे सपने देखे 

और आधे आधे मन से फिर 

आधे प्रयास करके देखे


क़िस्मत कोशिश, कभी धर्म कर्म

कभी पैसे या वक़्त की हेर फेर

कभी भय, ग्लानि या लाज शर्म 

कहीं पे है देर, कहीं पे अंधेर 


अब सूनी सूनी, नम सी हैं

ये आधी सोयी आँखे

और आधी बंद इन आँखो से 

आधी उम्मीदें झाँके


क्या ख़ूब किसी ने कहा कभी 

की ग्लास भरा है आधा 

पर आधे ख़ाली हिस्से का भी 

तो होगा कोई इरादा 


इस आधे जीवन से अब तो

बस हमने किया किनारा 

और ज़ोर लगा कर पूरा अब 

है मुस्कानो को पुकारा


अब हर लम्हा पूरा होगा

हर सपना होगा पूरा

ना कोशिश बाक़ी होगी अब

ना कोई लक्ष्य अधूरा